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खेतिहर  परिचय संसार में जब से मानव की उत्पत्ति हुयी है तभी से अपने भरण पोषण के लिए वह संघर्ष करता रहा है और रोटी, कपडा और मकान की व्यवस्था करने और पेट भरने के लिए विभिन्न युक्तियों को अपनाता रहा है | जब किसी उत्पादन का उद्देश्य ही हो कि सिर्फ भरण पोषण तो उससे आर्थिकी के मजबूतीकरण की कल्पना धुंधली दिखाई देती है | उत्पाद को पैदा करने से व्यापार तक बहुत से सफ़र को करने होते है  परिभाषा  खेती  जब खेत में किसी भी उत्पाद विशेष को पैदा किया जाता है तो खेती कहलाती है वहीँ इसको करने वाला खेतिहर अथवा किसान कहा जाता है | व्यापारी  जब कोई किसी भी वस्तु या सेवा का मोलभाव करता है और उसके बदले में लाभ की आकांक्षा रखता है तो वह व्यापारी कहा जाता है | लेकिन दोनों में जो विशेष अंतर पाया जाता है कि खेतिहर पूर्ण रूप से प्रकृति पर निर्भर करता है और पर्याप्त लाभ न मिलने की दशा में भी कुछ नही कर सकता है जबकि व्यापारी इसी का उलट होता है कि वह क्रय या विक्रय स्वयं तय करेगा जब उसको पर्याप्त लाभ मिलेगा | जब खेती को अधिकतम उत्पादन की दृष्टि से किया जाता है तो व्यवसायिक ...

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शिक्षा, सीख और समझ dze f”k{kk lh[k le> 1 शिक्षा संज्ञा है | सीख क्रिया है | समझ परिणाम है | 2 वर्तमान सन्दर्भ में  स्वत्रंत्रता निहित नहीं है  आयोजित अथवा   प्रायोजित होता है | इसमें स्वत्रन्रता निहित है  यह जीवन पर्यंत चलने वाली एक स्वतः स्फूर्त प्रक्रिया है सन्दर्भ, पूर्व ज्ञान एवं प्राथमिकताओं के आधार पर हम सभी अपनी समझ का निर्माण करते हैं| 3  क्या सीखाया अथवा पढ़ाया जाना है यह अमूमन शिक्षकों द्वारा पूर्व नियोजित पाठ्यक्रम के अनुसार तय होता है|  स्वायत्तता निहित नही होता है | सीखने पर किसी का नियंत्रण नहीं होता जयद टार मामलों में हम अनायास अथवा सायास सीखते रहते हैं|  स्वायत्तता निहित है | हमने क्या समझा है अथवा कितना समझा है यह हमारे   अनुप्रयोगात्मक कौशल के प्रदर्शन और उसके परिणाम से दृष्टीगोचर होता है| 4 इसमें सिखाने वाले का नियंत्रण होता है | इसमें सिखाने वाले का नियंत्रण होता है | सीखने वाले की अभिरुचि पर निर्भर करता है | 5 इसमें तयशुदा विषयवस्तु सम्मिलित किया जाता है | र...